3-Natak By Vinay Shukla (Hindi) (Hardcover)
This book is written by Vinay Shukla
₹360.00 ₹450.00
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The Tempest by William Shakespeare (Hardbak )
0 out of 5(0)- Page : 126
- ISBN : 9789356520158
- Dimensions : 22.5 x 14.5 x 1 cm
“Hell is empty and all the devils are here.” Penned by the world’s greatest dramatist, William Shakespeare, The Tempest introduced the concept of tragicomedy to drama literature. The play is set on a remote island, where Prospero, the rightful Duke of Milan and his daughter Miranda reside since past 12 years. Wrapped in magic and adventure, this fictional narrative traverses the readers through various themes of betrayal, power, unravelling romance between Ferdinand and Miranda, and a series of events which ultimately leads to a final face-off! Enchanting the readers to a world of mysticism and power, the play pulls the readers into the depths of their imagination, and lulls them to drown in their senses
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Dhruvswamini (Natak) by Jaishankar Prasad (H.B)
0 out of 5(0)ध्रुवस्वामिनी जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दी नाटक है। यह प्रसाद की अंतिम और श्रेष्ठ नाट्य-कृति है। इसका कथानक गुप्तकाल से सम्बद्ध और शोध द्वारा इतिहाससम्मत है। यह नाटक इतिहास की प्राचीनता में वर्तमान काल की समस्या को प्रस्तुत करता है। प्रसाद ने इतिहास को अपनी नाट्याभिव्यक्ति का माध्यम बनाकर शाश्वत मानव जीवन का स्वरूप दिखाया है, युग-समस्याओं के हल दिए हैं, वर्तमान के धुंधलके में एक ज्योति दी है, राष्ट्रीयता के साथ-साथ विश्व-प्रेम का सन्देश दिया है। इसलिए उन्होंने इतिहास में कल्पना का संयोजन कर इतिहास की वर्तमान से जोड़ने का प्रयास किया है। रंगमंच की दृष्टि से तीन अंकों का यह नाटक प्रसाद का सर्वोत्तम नाटक है। इसके पात्रों की संख्या सीमित है। इसके संवाद भी पात्रा अनुकूल और लघु हैं। भाषा पात्रों की भाषा के अनुकूल है। मसलन ध्रुवस्वामिनी की भाषा में वीरांगना की ओजस्विता है। इस नाटक में अनेक स्थलों पर अर्थवाक्यों की योजना है जो नाटक में सौंदर्य और गहरे अर्थ की सृष्टि करती है।
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0 out of 5(0)Othello, a soldier in the service of the Venetian Republic, is tricked by his villainous ensign, Iago, into believing that his beloved wife, Desdemona, is an adulteress. In a fit of emotional imbalance, Othello murders her in the most ungracious manner. What happens when he comes to know that she is innocent?
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Skandgupt (Natak) by Jaishankar Prasad (H.B)
0 out of 5(0)‘स्कन्दगुप्त’ नाटक 1928 में प्रकाशित एक ऐतिहासिक नाटक है। स्कंदगुप्त नाटक में गुप्तवंश के सन् 455 से लेकर सन् 466 तक के 11 वर्षों का वर्णन है। इस नाटक में लेखक ने गुप्त कालीन संस्कृति, इतिहास, राजनीति संघर्ष, पारिवारिक कलह एवं षडयंत्रों का वर्णन किया है। स्कंदगुप्त हूणों के आक्रमण (455 ई०) से हूण युद्ध की समाप्ति (466) तक की कहानी है। गुप्त राजवंश का समय 275 ई० से 540 ई० तक रहा। यह नाटक देशभक्त, वीर, साहसी, प्रेमी स्कंदगुप्त विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित ऐतिहासिक नाट्यकृति है। नाटक का आरम्भ स्कंदगुप्त के इस कथन से होता है। ” अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन है। ” छायावाद के आधार स्तंभों में से एक जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1890 को काशी में हुआ था। वह संपन्न व्यापारिक घराने के थे और उनका परिवार संपन्नता में केवल काशी नरेश से ही पीछे था। पिता और बड़े भाई की असामयिक मृत्यु के कारण उन्हें आठवीं कक्षा में ही विद्यालय छोड़कर व्यवसाय में उतरना पड़ा। उनकी ज्ञान वृद्धि फिर स्वाध्याय से हुई। उन्होंने घर पर रहकर ही हिंदी, संस्कृत एवं फ़ारसी भाषा एवं साहित्य का अध्ययन किया, साथ ही वैदिक वांग्मय और भारतीय दर्शन का भी ज्ञान अर्जित किया। वह बचपन से ही प्रतिभा संपन्न थे। आठ-नौ वर्ष की आयु में अमरकोश और लघु कौमुदी कंठस्थ कर लिया था जबकि ‘कलाधर उपनाम से कवित्त और सवैये भी लिखने लगे थे।
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