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Textile Technology
Kalin Nirman Mein Prakirya Niyantran by Dr. K.K.Goswami (H.B)
The term carpet is defined as a covering primarily for floor coverings may be made by using woven, knotted, tufted, knitted, braided or nonwoven technique. Carpet/ floor coverings consist of both natural and manmade very often in blends for making durable or nondurable carpets. Different techniques like Handmade (Knotted, Tufted, Tibetan, Loom made, Durrie, Soumak, Shaggy, Nonwoven, Chain Stitched), and machine made (Axminster, Wilton, Tufted, Face to Face, Velvet, Nonwoven) exists for the segment. As a whole, knowledge of fibres as a raw material for carpets occupies significant position in the process control. If weaknesses and opportunities associated with fibres, product manufacturing techniques can be removed and exploited respectively in appropriate manner, carpet can become a more predominant domain in over all textiles products perspective. Therefore, it is very important to study the mentioned trends in respect of process control to meet the buyer’s requirements.Classification of carpets has been made in terms of interior, bath textiles etc. compiling relevant trade information. Salient processes involved need to be specially controlled have been identified. Process and controls for the entire carpet sector have been discussed in modular form. To make the chapter more reader friendly process, process flow and control points elaborated. Application of statistical technique and other related issues which can strengthen process control have also been discussed. Social, ecology /environmental, economy, cultural. /human development, health-hygeine issues have also been touched in one way or other.
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Hindi Literature
Kamayani by Jaishankar Prasad (Hardback)
कला की दृष्टि से कामायनी, छायावादी काव्यकला का सर्वोत्तम प्रतीक माना जा सकता है। चित्तवृत्तियों का कथानक के पात्र के रूप में अवतरण इस महाकाव्य की अन्यतम विशेषता है। और इस दृष्टि से लज्जा, सौंदर्य, श्रद्धा और इड़ा का मानव रूप में अवतरण हिंदी साहित्य की अनुपम निधि है। कामायनी प्रत्यभिज्ञा दर्शन पर आधारित है। साथ ही इस पर अरविन्द दर्शन और गांधी दर्शन का भी प्रभाव यत्र तत्र मिल जाता है।प्रसाद ने इस काव्य के प्रधान पात्र ‘मनु’ और कामपुत्री कामायनी ‘श्रद्धा’ को ऐतिहासिक व्यक्ति के रूप में माना है, साथ ही जलप्लावन की घटना को भी एक ऐतिहासिक तथ्य स्वीकार किया है। शतपथ ब्राह्मण के प्रथम कांड के आठवें अध्याय से जलप्लावन संबंधी उल्लेखों का संकलन कर प्रसाद ने इस काव्य का कथानक निर्मित किया है, साथ ही उपनिषद् और पुराणों में मनु और श्रद्धा का जो रूपक दिया गया है, उन्होंने उसे भी अस्वीकार नहीं किया, वरन् कथानक को ऐसा स्वरूप प्रदान किया जिसमें मनु, श्रद्धा और इड़ा के रूपक की भी संगति भली भाँति बैठ जाए। परंतु सूक्ष्म सृष्टि से देखने पर जान पड़ता है कि इन चरित्रों के रूपक का निर्वाह ही अधिक सुंदर और सुसंयत रूप में हुआ, ऐतिहासिक व्यक्ति के रूप में वे पूर्णत: एकांगी और व्यक्तित्वहीन हो गए हैं।
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Fiction, Novel
Kankal by Jaishankar Prasad (Hardback)
कंकाल भारतीय समाज के विभिन्न संस्थानों के भीतरी यथार्थ का उद्घाटन करता है। समाज की सतह पर दिखायी पड़ने वाले धर्माचार्यों, समाज-सेवकों, सेवा-संगठनों के द्वारा विधवा और बेबस स्त्रियों के शोषण का एक प्रकार से यह सांकेतिक दस्तावेज हैं आकस्मिकता और कौतूहल के साथ-साथ मानव मन के भीतरी पर्तों पर होने वाली हलचल इस उपन्यास को गहराई प्रदान करती है। हृदय परिवर्तन और सेवा भावना स्वतंत्रताकालीन मूल्यों से जुड़कर इस उपन्यास में संघर्ष और अनुकूलन को भी सामाजिक कल्याण की दृष्टि का माध्यम बना देते हैं।उपन्यास अपने समय के नेताओं और स्वयंसेवकों के चरित्रांकन के माध्यम से एक दोहरे चरित्रवाली जिस संस्कृति का संकेत करता और बनते हुए जिन मानव संबंधों पर घण्टी और मंगल के माध्यम से जो रोशनी फेंकता है वह आधुनिक यथार्थ की पृष्ठभूमि बन जाता है। सृजनात्मकता की इस सांकेतिक क्षमता के कारण यह उपन्यास यथार्थ के भीतर विद्यमान उन शक्तियों को भी अभिव्यक्त कर सका है जो मनुष्य की जय यात्रा पर विश्वास दिलाती है।
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Fiction, Novel
Kapal Kundala By Bankim Chandra Chattopadhyay (Hardcover)
कपालकुंडला, बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित बंगाली भाषा का एक प्रेम उपन्यास है। इसकी रचना १८६६ में हुई थी। इसमें ‘कपालकुण्डला’ नामक एक वनवासी कन्या की कहानी है जो सप्तग्राम के नवकुमार नामक एक लड़के से प्यार करने लगती है और फिर उससे विवाह कर लेती है। उपन्यास में दिखाया गया है कि वह वनवासी कन्या नगर के जीवन से तालमेल नहीं बैठा पाती है।
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History, Religion
Karma and Raja Yoga by Swami Vivekananda (Hardcover)
- ISBN : 978-8182479104
- Page : 164
- Dimensions : 22.5 x 14.5 x 1.3 cm
Karma yoga, also called karma marga, is one of the three classical spiritual paths in Hinduism, one based on the yoga of action the others being Jnana yoga and Bhakti yoga. To a karma yoga right action is a form of prayer. Raja Yoga was both the goal of yoga and a method of attain it. The term also became a modern name for the practice of yoga in the 19th century when Swami Vevekananda gave his interpretation of the Yoga Sutras of Patanjali in his book Raja Yoga.
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Fiction, Novel
Karmabhoomi By Munshi PremChand (Hardcover)
प्रेमचंद (प्रेमचन्द) के साहित्यिक जीवन का आरंभ (आरम्भ) 1901 से हो चुका था आरंभ (आरम्भ) में वे नवाब राय के नाम से उर्दू में लिखते थे। प्रेमचंद की पहली रचना के संबंध में रामविलास शर्मा लिखते हैं कि-“प्रेमचंद की पहली रचना, , जो अप्रकाशित ही रही, शायद उनका वह नाटक था जो उन्होंने अपने मामा जी के प्रेम और उस प्रेम के फलस्वरूप चमारों द्वारा उनकी पिटाई पर लिखा था। इसका जिक्र उन्होंने ‘पहली रचना’ नाम के अपने लेख में किया है।”उनका पहला उपलब्ध लेखन उर्दू उपन्यास ‘असरारे मआबिद’ है जो धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ। इसका हिंदी रूपांतरण देवस्थान रहस्य नाम से हुआ। प्रेमचंद का दूसरा उपन्यास ‘हमखुर्मा व हमसवाब’ है जिसका हिंदी रूपांतरण ‘प्रेमा’ नाम से १९०७ में प्रकाशित हुआ। १९०८ ई. में उनका पहला कहानी संग्रह सोज़े-वतन प्रकाशित हुआ। देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत इस संग्रह को अंग्रेज़ सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया और इसकी सभी प्रतियाँ जब्त कर लीं और इसके लेखक नवाब राय को भविष्य में लेखन न करने की चेतावनी दी। इसके कारण उन्हें नाम बदलकर प्रेमचंद के नाम से लिखना पड़ा। उनका यह नाम दयानारायन निगम ने रखा था। ‘प्रेमचंद’ नाम से उनकी पहली कहानी बड़े घर की बेटी ज़माना पत्रिका के दिसम्बर १९१० के अंक में प्रकाशित हुई।
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Novel
Karmabhoomi by Munshi Premchand (Hardcover)
प्रेमचंद (प्रेमचन्द) के साहित्यिक जीवन का आरंभ (आरम्भ) 1901 से हो चुका था आरंभ (आरम्भ) में वे नवाब राय के नाम से उर्दू में लिखते थे। प्रेमचंद की पहली रचना के संबंध में रामविलास शर्मा लिखते हैं कि-“प्रेमचंद की पहली रचना, , जो अप्रकाशित ही रही, शायद उनका वह नाटक था जो उन्होंने अपने मामा जी के प्रेम और उस प्रेम के फलस्वरूप चमारों द्वारा उनकी पिटाई पर लिखा था। इसका जिक्र उन्होंने ‘पहली रचना’ नाम के अपने लेख में किया है।”उनका पहला उपलब्ध लेखन उर्दू उपन्यास ‘असरारे मआबिद’ है जो धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ। इसका हिंदी रूपांतरण देवस्थान रहस्य नाम से हुआ। प्रेमचंद का दूसरा उपन्यास ‘हमखुर्मा व हमसवाब’ है जिसका हिंदी रूपांतरण ‘प्रेमा’ नाम से १९०७ में प्रकाशित हुआ। १९०८ ई. में उनका पहला कहानी संग्रह सोज़े-वतन प्रकाशित हुआ। देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत इस संग्रह को अंग्रेज़ सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया और इसकी सभी प्रतियाँ जब्त कर लीं और इसके लेखक नवाब राय को भविष्य में लेखन न करने की चेतावनी दी। इसके कारण उन्हें नाम बदलकर प्रेमचंद के नाम से लिखना पड़ा। उनका यह नाम दयानारायन निगम ने रखा था। ‘प्रेमचंद’ नाम से उनकी पहली कहानी बड़े घर की बेटी ज़माना पत्रिका के दिसम्बर १९१० के अंक में प्रकाशित हुई।
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History, literary fiction, literature
Kautilya Arthashastra [hardcover] by Kautilya
The Arthashastra is an ancient Indian treatise on statecraft, economics, and military strategy, written by Kautilya, also known as Chanakya or Vishnugupta, around the 4th century BCE. It serves as a comprehensive guide for rulers on how to govern efficiently and maintain a prosperous and secure kingdom. The text covers a wide range of topics, including governance, diplomacy, trade, taxation, law, war, and ethics, blending practical advice with philosophical insights. Kautilya emphasizes the importance of a strong and disciplined administration, strategic alliances, and the welfare of the people as the foundation of a stable and thriving state
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Management
Kautilyas Arthashastra (Hardback)
Kautilya or Chanakya was an Indian philosopher, teacher and advisor. He aided Chandragupta Maurya in founding the massive Mauryan Empire. He was born in Taxila, South India. He is the founder of political science and economics in India. He encouraged international trade and helped rulers make their visions a reality. He felt that the state should have total control over land, water and mining. He strongly recommended keeping a check on government functions by keeping an eye on money transactions. His age old policies seem to ring true today too and are followed by many people.
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Hindi Literature
Kavya Aur Kala Tatha Anya Nibandh By Jaishankar Parsad (Hardcover)
‘काव्य और कला तथा अन्य निबन्ध’ में नौ निबन्ध संकलित हैं, जिनमें तीन नाटक से संबंध रखते हैं। आरम्भ में काव्य और कला के संबंधों पर विचार किया गया है, फिर रहस्यवाद और रस का विवेचन है। बीच के नाटक संबंधी तीन निबन्धों के बाद आरम्भिक पाठ्यक्रम है और अंत में ‘यथार्थवाद और छायावाद’ शीर्षक समापन निबन्ध।
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Drawing, Skill Development
Keep It Up: A Positive Thoughts Colouring Book For Adults With Easy Tear; A Craft Therapy Series; Premium Quality (Paperback)
Drawing, Skill DevelopmentKeep It Up: A Positive Thoughts Colouring Book For Adults With Easy Tear; A Craft Therapy Series; Premium Quality (Paperback)
Presenting the craft therapy series. A colouring book for adults with easy tear, so that you can turn your masterpiece into home decore with utmost ease. The books are carefully crafted with premium quality paper and printing in order to give the artist in you a great experience. This book includes motivational quotes with beautiful background designs that are sure to rejuvenate your creative senses and once done will brightenup your home or office walls.
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