Karma Yoga Sastra : Golden Embossed Collector’s Edition by Bal Gangadhar Tilak(Hardcover)
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Hindu Pad-Padashahi By Veer Savakar (Hardcover)
0 out of 5(0)Vinayak Damodar Savarkar, also known as Swatantryaveer Savarkar, was a freedom fighter and an Indian independence leader and politician who coined the Hindu nationalist ideology of Hindutva. “Hindu Pad Padshahi,” refers to the idea of establishing a Hindu monarchy or a Hindu kingdom. This concept was proposed by Savarkar as part of his vision for India’s future. He believed that an independent India should be a Hindu- majority nation, where Hindu culture and values would be dominant. Savarkar’s ideas and philosophy, on the concept of “Hindu Pad Padshahi,” have been subjects of both praise and criticism. While some consider him a visionary and a champion of Hindu rights, others criticize his ideology for its emphasis on religious identity and its potential exclusionary nature.
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Do Behnein By Rabindranath Tagore (Hardcover)
0 out of 5(0)स्त्रियाँ दो जाति की होती हैं, ऐसा मैंने किसी-किसी पंडित से सुना है। एक जाति प्रधानतया माँ होती है, दूसरी प्रिया । ऋतुओं के साथ यदि तुलना की जाय तो माँ होगी वर्षाऋतु यह जल देती है, फल देती है, ताप शमन करती है, ऊर्ध्वलोक से अपने आपको विगलित कर देती है, शुष्कता को दूर करती है, अभावों को भर देती है। और प्रिया है वसन्तऋतु। गभीर है उसका रहस्य, मधुर है उसका मायामंत्र। चञ्चलता उसकी रक्त में तरङ्ग लहरा देती है और चित्त के उस मणिकोष्ठ में पहुँचती है जहाँ सोने की वीणा में एक निभृत तार चुपचाप, झंकार की प्रतीक्षा में, पड़ा हुआ है; झंकार- जिससे समस्त देह और मन में अनिर्वचनीय की वाणी झंकृत हो उठती है।
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Essentials Of Hindutva By Veer Savarkar (Hardcover)
0 out of 5(0)Essentials of Hindutva is an ideological epigraph by Vinayak Damodar Savarkar published in 1923. It was retitled Hindutva: Who Is a Hindu? (with the second phrase as a subtitle) when reprinted in 1928. Savarkar’s epigraph forms part of the canon of works published during British rule that later influenced post-independence contemporary Hindu nationalism.
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Aankh Ki Kirkiri By Rabindranth Tagore (Hardcover)
0 out of 5(0)रवीन्द्रनाथ टैगोर के सुप्रसिद्ध उपन्यास ‘चोखेर बालि’ का हिन्दी अनुवाद है – ‘आंख की किरकिरी’ । इस उपन्यास की गिनती रवीन्द्रनाथ टैगोर की – उत्कृष्ट रचनाओं में होती है। यद्यपि रवीन्द्रनाथ के लिखे ऐसे अनेक उपन्यास हैं जो ‘चोखेर बालि’ से अधिक विख्यात हैं, परंतु इस उपन्यास के पात्रों में जो विविधता और गहराई है, वह अन्य उपन्यासों के पात्रों में देखने को नहीं मिलती। उपन्यास का प्रत्येक पात्र पाठक को अंत तक बांधे रखता है। साथ ही संदेश देता है प्रेम, धैर्य एवं त्याग का ।
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