पिछले एक-दो दशक से साहित्य में लघुकथा एक सशक्त विधा के रूप में उभरी है। हिंदी में ही नहीं अपितु अन्य भारतीय व विदेशी भाषाओं में भी असंख्य लघुकथाएं लिखी गई हैं। देश के कई प्रांतों से वहां के लघुकथाकारों का एकल एवं संयुक्त प्रयास भी समय-समय पर प्रकाशित होता रहा है। इस दृष्टिगत हिमाचल प्रदेश से लघुकथा पर संयुक्त रूप से यह प्रथम पुस्तक है। मुझे ढेरों रचनाएं मिलीं पर उनमें से सभी लघुकथा के दायरे में नहीं आती थी। यह हर्ष का विषय है कि लघुकथा लिखने के लिए कई नए लेखकों ने भी प्रयास किया। उनमें से कुछ लोगों की सामान्य त्रुटियों को नजर अंदाज कर उनकी रचनाएं इस संकलन में शामिल भी कर ली गई हैं। जिनकी रचनाएं शामिल न हो सकीं, उन रचनाकारों से मेरा अनुरोध है कि वे अपना प्रयास न छोड़ें। हिमाचल कला, संस्कृति व भाषा अकादमी के सचिव सुदर्शन वशिष्ठ के अनुसार हिमाचल में लंबी कहानी लिखने वाले तो बहुत हैं पर लघुकथाएं बहुत कम लोगों ने लिखी हैं। इस दृष्टि से भी इस पुस्तक का महत्त्व बढ़ जाता है। अंत में सहयोगी भावना और शुभाकांक्षाओं के लिए में सर्वश्री पी.सी. के. प्रेम, प्रेम पखरोलवी, डॉ. जगदीश शर्मा, जीतेंद्र अवस्थी, गुरमीत बेदी, सैन्नी अशेष का धन्यवाद करता हूं। साथ ही लघुकथा में इस क्षेत्र के सशक्त हस्ताक्षर श्री कमलेश भारतीय का विशेष धन्यवाद, जिन्होंने एक आलेख ‘लघुकथा में प्रयोगों का सिलसिला प्रस्तुत संकलन के लिए लिखा। इस विधा के प्रति समर्पित डा. सतीशराज पुष्करणा का एक सारगर्भित लेख भी साभार इसमें शामिल है।
Hindi Literature, Short Story
Himachal Ki 40 shreshth Laghu Kathayen by Ratanchand Ratnesh (Hardcover)
पिछले एक-दो दशक से साहित्य में लघुकथा एक सशक्त विधा के रूप में उभरी है। हिंदी में ही नहीं अपितु अन्य भारतीय व विदेशी भाषाओं में भी असंख्य लघुकथाएं लिखी गई हैं। देश के कई प्रांतों से वहां के लघुकथाकारों का एकल एवं संयुक्त प्रयास भी समय-समय पर प्रकाशित होता रहा है। इस दृष्टिगत हिमाचल प्रदेश से लघुकथा पर संयुक्त रूप से यह प्रथम पुस्तक है।
₹325.00 ₹395.00
| Weight | 235 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.3 cm |







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