Shop
Showing 361–375 of 1024 resultsSorted by latest
-
Hindi Literature, literature
Babandar Bahar Bhitar :kahani sangrah ke mulya bodh By Dr. Nisha (Hindi) (Hardcover)
Hindi Literature, literatureBabandar Bahar Bhitar :kahani sangrah ke mulya bodh By Dr. Nisha (Hindi) (Hardcover)
Dr. Nisha .Place of Birth- Karnal,Qualifications – M.A. M.Phil., Ph.D. (Hindi) Presently – in Government Post Graduate College, Sector-11, Chandigarh (Assistant Lecturer) Leaked consciousness in the publication method, published compositions in almost all important newspapers and magazines and variousEqual participation in seminars and literary events in universities and colleges and Prof. Meera Gautam Ji’s book” Meera Gautam Rachnavali Member of the Advisory Board. Permanent Address M. No. 1070, Sector 23 B, ChandigarhTel-99880-65842The stories in this collection mainly reveal the reality of Mauritian politics, society, religion, culture etc. After the independence of Mauritius, the realization of politicians in the society there, the form in which smuggling, corruption and treason has emerged, the change that has taken place in man-to-man relations. Circumstances of exploitation of women have been created, morality and human relations have been destroyed. These stories reveal the maelstrom that is churning life in Mauritius from both the inside and the outside. The common man is scared and is looking for a way out.SKU: n/a -
Health & Wellbeing
Swasth Jeevan ke Sopan By Dr. R.P. chug (Hardcover)
The scholar author of Shridham book has underlined the factors of life very clearly. Bihar suddenly belongs to the Indian to become hack free. Aadha took place on 29 September 1954 in Delhi. Hum Ram Mahayani’s Chhat Senatak’s education was completed in Diksha Shivani. Under the guidance of his maternal grandfather, the author did the literature of Ayurdev Parelu Mala Nehimi. Yoga Pranayam Kesar has been fully devoted to the process of popularizing Naturopathy since last one decade.
SKU: n/a -
Fiction, Novel
Kapal Kundala By Bankim Chandra Chattopadhyay (Hardcover)
कपालकुंडला, बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित बंगाली भाषा का एक प्रेम उपन्यास है। इसकी रचना १८६६ में हुई थी। इसमें ‘कपालकुण्डला’ नामक एक वनवासी कन्या की कहानी है जो सप्तग्राम के नवकुमार नामक एक लड़के से प्यार करने लगती है और फिर उससे विवाह कर लेती है। उपन्यास में दिखाया गया है कि वह वनवासी कन्या नगर के जीवन से तालमेल नहीं बैठा पाती है।
SKU: n/a -
Fiction, Novel
Sati By Sarat Chandra Chattopadhyay (Hardcover)
हरीश पबना एक संभ्रांत, भला वकील है, केवल वकालत के हिसाब से ही नहीं, मनुष्यता के हिसाब से भी । अपने देश के सब प्रकार के शुभ अनुष्ठानों के साथ वह थोड़ा-बहुत संबंधित रहता है। शहर का कोई भी काम उसे अलग रखकर नहीं होता। सबेरे ‘दुर्नीति – दमन समिति’ की कार्यकारिणी सभा का एक विशेष अधिवेशन था, काम समाप्तकर घर लौटते हुए थोड़ा विलंब हो गया था। अब किसी तरह थोड़ा सा खा-पीकर अदालत पहुँचना आवश्यक है। विधवा छोटी बहन उमा पास बैठी हुई देखभाल कर रही थी कि कहीं समय की कमी से खाने-पीने में कमी न रह जाए।
SKU: n/a -
Hindi Literature
Kavya Aur Kala Tatha Anya Nibandh By Jaishankar Parsad (Hardcover)
‘काव्य और कला तथा अन्य निबन्ध’ में नौ निबन्ध संकलित हैं, जिनमें तीन नाटक से संबंध रखते हैं। आरम्भ में काव्य और कला के संबंधों पर विचार किया गया है, फिर रहस्यवाद और रस का विवेचन है। बीच के नाटक संबंधी तीन निबन्धों के बाद आरम्भिक पाठ्यक्रम है और अंत में ‘यथार्थवाद और छायावाद’ शीर्षक समापन निबन्ध।
SKU: n/a -
Fiction, Novel
Manjhali Didi By Sarat chandra Chattopadhyay (Hardcover)
शरतचन्द्र भारतीय वांग्मय के ऐसे अप्रतिम हस्ताक्षर हैं जो कालातीत और युग संधियों से परे हैं। उन्होंने जिस महान साहित्य की रचना की है उसने पीढ़ी-दर-पीढ़ी पाठकों को सम्मोहित और संचारित किया है। उनके अनेक उपन्यास भारत की लगभग हर भाषा में उपलब्ध हैं। उन्हें हिंदी में प्रस्तुत कर हम गौरवान्वित हैं। प्रस्तुत उपन्यास ‘मझली दीदी’ एक ऐसी स्नेहमयी नारी की कहानी है जो अपनी जेठानी के अनाथ भाई को अपने बेटे के समान प्यार करने लगती है। यहां तक कि उसे अपनी जेठानी और जेठ आदि के अत्याचारों से बचाने के लिए पति को छोड़ने पर तैयार हो जाती है। इस सशक्त रचना पर ‘चौखेर बाली’ के नाम बंगाली में फिल्म भी बन रही है जिसमें मझली दीदी की भूमिका हिंदी की प्रसिद्ध नायिका ऐश्वर्या राय निभा रही हैं।
SKU: n/a -
Fiction, Novel
Parineeta By Sarat Chandra Chattopadhyay (Hardcover)
परिणीता कहानी है ललिता तथा शेखर की । ललिता के माता पिता का देहांत हो चुका है तथा वह अपने मामा मामी के परिवार के साथ रहती है। ललिता के मामा अपनी पुत्रियों तथा ललिता के विवाह के संदर्भ में बहुत चिंतित रहते हैं और इसी प्रक्रिया में उन्होंने अपनी एक मात्र संपत्ति, अपना घर शेखर के पिता को गिरवी दे दिया है। ललिता व शेखर एक दूसरे को बचपन से जानते है, यहाँ तक कि ललिता के जीवन में, शेखर की आज्ञा के बिना एक पत्ता तक नही हिलता । “ जिस प्रकार मनुष्य अपनी बुद्धि से सोचकर कोई धारणा निर्धारित कर लेता है, उसी प्रकार उसने अपनी स्वाभाविक बुद्धि से उसकी आज्ञा मानना स्वीकार कर लिया था । ” ललिता व शेखर एक दूसरे को पसंद तो करते है परंतु शेखर की पिता उसकी शादी किसी अमीर घर में करना चाहते हैं। कहानी में तीसरा एवं चिल्चस्प किरदार है, गिरीन्द्र बाबू। वे ललिता के पड़ोसी के भाई हैं तथा ललिता से विवाह भी करना चाहते हैं। गिरीन्द्र बाबू के मौजुदगी में यह प्रेम त्रिकोण एक अनूठा रूप लेता है।
SKU: n/a -
Fiction, Novel
Dehati Samaj By Sarat Chandra Chattopadhyay (Hardcover)
शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय बांग्ला भाषा के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार थे। हुगली जिले के देवानंदपुर गांव में 15 सितंबर 1876 में उनका जन्म हुआ। शरतचंद्र के नौ भाई-बहन थे। रवींद्रनाथ ठाकुर और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की लेखनी का शरत पर गहरा प्रभाव पड़ा। करीब 18 साल की उम्र में उन्होंने “बासा” (घर) नाम से एक उपन्यास लिखा लेकिन यह रचना प्रकाशित नहीं हुई। शरतचन्द्र ललित कला के छात्र थे लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वे इसकी पढ़ाई नहीं कर सके। रोजगार के तलाश में शरतचन्द्र बर्मा गए और लोक निर्माण विभाग में क्लर्क के रूप में काम किया। कुछ समय बर्मा रहकर कलकत्ता लौटने के बाद उन्होंने गंभीरता के साथ लेखन शुरू कर दिया।
SKU: n/a -
Fiction, Novel
Path Ke Davedar By Sarat Chandra Chattopadhyay (Hardcover)
आजीविका के नाम पर बंगाली युवा ब्राह्मण अपूर्व बर्मा (अब म्यांमार) चला तो गया किंतु वहां परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि वह क्रांतिकारियों का हमदर्द बन गया। शायद इस के पीछे युवा भारती का आकर्षण भी एक कारण रहा हो। बंगाल के क्रांतिकारी आंदोलन की पृष्ठभूमि पर रचित इस उपन्यास – ‘पथ के दावेदार’ के माध्यम से ‘नारी वेदना के पुरोहित’ शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने क्रांतिकारी गतिविधियों के साथसाथ तत्कालीन समाज में व्याप्त छुआछूत, जातिपांति, ऊंचनीच आदि सामाजिक बुराइयों को रेखांकित किया है।
SKU: n/a -
Fiction, Novel
Biraj Bahu By Sarat Chandra Chattopadhyay (Hardcover)
हुगली जिले का सप्तग्राम-उसमें दो भाई नीलाम्बर व पीताम्बर रहते थे। नीलाम्बर मुर्दे जलाने, कीर्तन करने, ढोल बजाने और गांजे का दम भरने में बेजोड़ था। उसका कद लम्बा, बदन गोरा, बहुत ही चुस्त, फुर्तीला तथा ताकतवर था। दूसरों के के मामले में उसकी ख्याति बहुत थी तो गंवारपन में भी वह गाँव- -भर में बदनाम था। मगर उसका छोटा भाई पीताम्बर उसके विपरीत था। वह दुर्बल तथा नाटे कद का था। शाम के बाद किसी के मरने का समाचार सुनकर उसका शरीर अजीब-सा हो जाता था। वह अपने भाई जैसा मूर्ख ही नहीं था तथा मूर्खता की कोई बात भी उसमें नहीं थी । सवेरे ही वह भोजन करके अपना बस्ता लेकर अदालत चला जाता था। पश्चिमी तरफ एक आम के पेड़ के नीचे बैठकर वह दिनभर अर्जियां लिखा करता था। वह जो कुछ भी कमाता था, उसे घर आकर सन्दूक में बंद कर देता था। रात को सारे दरवाजे-खिड़कियां बन्द कर और उनकी कई बार जाँच करने के बाद वह सोता था।
SKU: n/a














